Book 2 • Chapter 300
Section 300
10 verses
Verse 1
सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ आयउँ लाइ रजायसु बाएँ
Verse 2
तबहुँ कृपाल हेरि निज ओरा सबहि भाँति भल मानेउ मोरा
Verse 3
देखेउँ पाय सुमंगल मूला जानेउँ स्वामि सहज अनुकूला
Verse 4
बड़ें समाज बिलोकेउँ भागू बड़ीं चूक साहिब अनुरागू
Verse 5
कृपा अनुग्रह अंगु अघाई कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई
Verse 6
राखा मोर दुलार गोसाईं अपनें सील सुभायँ भलाईं
Verse 7
नाथ निपट मैं कीन्हि ढिठाई स्वामि समाज सकोच बिहाई
Verse 8
अबिनय बिनय जथारुचि बानी छमिहि देउ अति आरति जानी
Verse 9
सुह्रद सुजान सुसाहिबहि बहुत कहब बड़ि खोरि
Verse 10
आयसु देइअ देव अब सबइ सुधारी मोरि
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