Book 2 • Chapter 326
Section 326
8 verses
Verse 1
पुलक गात हियँ सिय रघुबीरू जीह नामु जप लोचन नीरू
Verse 2
लखन राम सिय कानन बसहीं भरतु भवन बसि तप तनु कसहीं
Verse 3
दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू सब बिधि भरत सराहन जोगू
Verse 4
सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं देखि दसा मुनिराज लजाहीं
Verse 5
परम पुनीत भरत आचरनू मधुर मंजु मुद मंगल करनू
Verse 6
हरन कठिन कलि कलुष कलेसू महामोह निसि दलन दिनेसू
Verse 7
पाप पुंज कुंजर मृगराजू समन सकल संताप समाजू
Verse 8
जन रंजन भंजन भव भारू राम सनेह सुधाकर सारू
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