Book 2 • Chapter 325
Section 325
10 verses
Verse 1
देह दिनहुँ दिन दूबरि होई घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई
Verse 2
नित नव राम प्रेम पनु पीना बढ़त धरम दलु मनु न मलीना
Verse 3
जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे बिलसत बेतस बनज बिकासे
Verse 4
सम दम संजम नियम उपासा नखत भरत हिय बिमल अकासा
Verse 5
ध्रुव बिस्वास अवधि राका सी स्वामि सुरति सुरबीथि बिकासी
Verse 6
राम पेम बिधु अचल अदोषा सहित समाज सोह नित चोखा
Verse 7
भरत रहनि समुझनि करतूती भगति बिरति गुन बिमल बिभूती
Verse 8
बरनत सकल सुकचि सकुचाहीं सेस गनेस गिरा गमु नाहीं
Verse 9
नित पूजत प्रभु पाँवरी प्रीति न हृदयँ समाति
Verse 10
मागि मागि आयसु करत राज काज बहु भाँति
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