Book 2 • Chapter 5
Section 5
9 verses
Verse 1
मुदित महिपति मंदिर आए सेवक सचिव सुमंत्रु बोलाए
Verse 2
कहि जयजीव सीस तिन्ह नाए भूप सुमंगल बचन सुनाए
Verse 3
जौं पाँचहि मत लागै नीका करहु हरषि हियँ रामहि टीका
Verse 4
मंत्री मुदित सुनत प्रिय बानी अभिमत बिरवँ परेउ जनु पानी
Verse 5
बिनती सचिव करहि कर जोरी जिअहु जगतपति बरिस करोरी
Verse 6
जग मंगल भल काजु बिचारा बेगिअ नाथ न लाइअ बारा
Verse 7
नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा
Verse 8
कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ
Verse 9
राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ
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