Book 2 • Chapter 53
Section 53
10 verses
Verse 1
तात जाउँ बलि बेगि नहाहू जो मन भाव मधुर कछु खाहू
Verse 2
पितु समीप तब जाएहु भैआ भइ बड़ि बार जाइ बलि मैआ
Verse 3
मातु बचन सुनि अति अनुकूला जनु सनेह सुरतरु के फूला
Verse 4
सुख मकरंद भरे श्रियमूला निरखि राम मनु भवरुँ न भूला
Verse 5
धरम धुरीन धरम गति जानी कहेउ मातु सन अति मृदु बानी
Verse 6
पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू
Verse 7
आयसु देहि मुदित मन माता जेहिं मुद मंगल कानन जाता
Verse 8
जनि सनेह बस डरपसि भोरें आनँदु अंब अनुग्रह तोरें
Verse 9
बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु बचन प्रमान
Verse 10
आइ पाय पुनि देखिहउँ मनु जनि करसि मलान
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