Book 2 • Chapter 98
Section 98
10 verses
Verse 1
पितु बैभव बिलास मैं डीठा नृप मनि मुकुट मिलित पद पीठा
Verse 2
सुखनिधान अस पितु गृह मोरें पिय बिहीन मन भाव न भोरें
Verse 3
ससुर चक्कवइ कोसलराऊ भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ
Verse 4
आगें होइ जेहि सुरपति लेई अरध सिंघासन आसनु देई
Verse 5
ससुरु एतादृस अवध निवासू प्रिय परिवारु मातु सम सासू
Verse 6
बिनु रघुपति पद पदुम परागा मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा
Verse 7
अगम पंथ बनभूमि पहारा करि केहरि सर सरित अपारा
Verse 8
कोल किरात कुरंग बिहंगा मोहि सब सुखद प्रानपति संगा
Verse 9
सासु ससुर सन मोरि हुँति बिनय करबि परि पायँ
Verse 10
मोर सोचु जनि करिअ कछु मैं बन सुखी सुभायँ
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