Book 2 • Chapter 97
Section 97
10 verses
Verse 1
बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती आरति प्रीति न सो कहि जाती
Verse 2
पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना
Verse 3
सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू फिरतु त सब कर मिटै खभारू
Verse 4
सुनि पति बचन कहति बैदेही सुनहु प्रानपति परम सनेही
Verse 5
प्रभु करुनामय परम बिबेकी तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी
Verse 6
प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई कहँ चंद्रिका चंदु तजि जाई
Verse 7
पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई कहति सचिव सन गिरा सुहाई
Verse 8
तुम्ह पितु ससुर सरिस हितकारी उतरु देउँ फिरि अनुचित भारी
Verse 9
आरति बस सनमुख भइउँ बिलगु न मानब तात
Verse 10
आरजसुत पद कमल बिनु बादि जहाँ लगि नात
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