Book 2 • Chapter 96
Section 96
10 verses
Verse 1
तुम्ह पुनि पितु सम अति हित मोरें बिनती करउँ तात कर जोरें
Verse 2
सब बिधि सोइ करतब्य तुम्हारें दुख न पाव पितु सोच हमारें
Verse 3
सुनि रघुनाथ सचिव संबादू भयउ सपरिजन बिकल निषादू
Verse 4
पुनि कछु लखन कही कटु बानी प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी
Verse 5
सकुचि राम निज सपथ देवाई लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई
Verse 6
कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू
Verse 7
जेहि बिधि अवध आव फिरि सीया सोइ रघुबरहि तुम्हहि करनीया
Verse 8
नतरु निपट अवलंब बिहीना मैं न जिअब जिमि जल बिनु मीना
Verse 9
मइकें ससरें सकल सुख जबहिं जहाँ मनु मान
Verse 10
तँह तब रहिहि सुखेन सिय जब लगि बिपति बिहान
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