Book 2 • Chapter 95
Section 95
10 verses
Verse 1
तात कृपा करि कीजिअ सोई जातें अवध अनाथ न होई
Verse 2
मंत्रहि राम उठाइ प्रबोधा तात धरम मतु तुम्ह सबु सोधा
Verse 3
सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा सहे धरम हित कोटि कलेसा
Verse 4
रंतिदेव बलि भूप सुजाना धरमु धरेउ सहि संकट नाना
Verse 5
धरमु न दूसर सत्य समाना आगम निगम पुरान बखाना
Verse 6
मैं सोइ धरमु सुलभ करि पावा तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा
Verse 7
संभावित कहुँ अपजस लाहू मरन कोटि सम दारुन दाहू
Verse 8
तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ दिएँ उतरु फिरि पातकु लहऊँ
Verse 9
पितु पद गहि कहि कोटि नति बिनय करब कर जोरि
Verse 10
चिंता कवनिहु बात कै तात करिअ जनि मोरि
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