Book 2 • Chapter 94
Section 94
10 verses
Verse 1
सखा समुझि अस परिहरि मोहु सिय रघुबीर चरन रत होहू
Verse 2
कहत राम गुन भा भिनुसारा जागे जग मंगल सुखदारा
Verse 3
सकल सोच करि राम नहावा सुचि सुजान बट छीर मगावा
Verse 4
अनुज सहित सिर जटा बनाए देखि सुमंत्र नयन जल छाए
Verse 5
हृदयँ दाहु अति बदन मलीना कह कर जोरि बचन अति दीना
Verse 6
नाथ कहेउ अस कोसलनाथा लै रथु जाहु राम कें साथा
Verse 7
बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई आनेहु फेरि बेगि दोउ भाई
Verse 8
लखनु रामु सिय आनेहु फेरी संसय सकल सँकोच निबेरी
Verse 9
नृप अस कहेउ गोसाईं जस कहइ करौं बलि सोइ
Verse 10
करि बिनती पायन्ह परेउ दीन्ह बाल जिमि रोइ
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