Book 2 • Chapter 93
Section 93
10 verses
Verse 1
अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू काहुहि बादि न देइअ दोसू
Verse 2
मोह निसाँ सबु सोवनिहारा देखिअ सपन अनेक प्रकारा
Verse 3
एहिं जग जामिनि जागहिं जोगी परमारथी प्रपंच बियोगी
Verse 4
जानिअ तबहिं जीव जग जागा जब जब बिषय बिलास बिरागा
Verse 5
होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा तब रघुनाथ चरन अनुरागा
Verse 6
सखा परम परमारथु एहू मन क्रम बचन राम पद नेहू
Verse 7
राम ब्रह्म परमारथ रूपा अबिगत अलख अनादि अनूपा
Verse 8
सकल बिकार रहित गतभेदा कहि नित नेति निरूपहिं बेदा
Verse 9
भगत भूमि भूसुर सुरभि सुर हित लागि कृपाल
Verse 10
करत चरित धरि मनुज तनु सुनत मिटहि जग जाल
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