Book 1 • Chapter 103
Section 103
8 verses
Verse 1
तुरत भवन आए गिरिराई सकल सैल सर लिए बोलाई
Verse 2
आदर दान बिनय बहुमाना सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना
Verse 3
जबहिं संभु कैलासहिं आए सुर सब निज निज लोक सिधाए
Verse 4
जगत मातु पितु संभु भवानी तेही सिंगारु न कहउँ बखानी
Verse 5
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा गनन्ह समेत बसहिं कैलासा
Verse 6
हर गिरिजा बिहार नित नयऊ एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ
Verse 7
तब जनमेउ षटबदन कुमारा तारकु असुर समर जेहिं मारा
Verse 8
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना षन्मुख जन्मु सकल जग जाना
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