Book 1 • Chapter 108
Section 108
10 verses
Verse 1
जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी जानिअ सत्य मोहि निज दासी
Verse 2
तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना
Verse 3
जासु भवनु सुरतरु तर होई सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई
Verse 4
ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी
Verse 5
प्रभु जे मुनि परमारथबादी कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी
Verse 6
सेस सारदा बेद पुराना सकल करहिं रघुपति गुन गाना
Verse 7
तुम्ह पुनि राम राम दिन राती सादर जपहु अनँग आराती
Verse 8
रामु सो अवध नृपति सुत सोई की अज अगुन अलखगति कोई
Verse 9
जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि
Verse 10
देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि
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