Book 1 • Chapter 111
Section 111
10 verses
Verse 1
पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी
Verse 2
भगति ग्यान बिग्यान बिरागा पुनि सब बरनहु सहित बिभागा
Verse 3
औरउ राम रहस्य अनेका कहहु नाथ अति बिमल बिबेका
Verse 4
जो प्रभु मैं पूछा नहि होई सोउ दयाल राखहु जनि गोई
Verse 5
तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना आन जीव पाँवर का जाना
Verse 6
प्रस्न उमा कै सहज सुहाई छल बिहीन सुनि सिव मन भाई
Verse 7
हर हियँ रामचरित सब आए प्रेम पुलक लोचन जल छाए
Verse 8
श्रीरघुनाथ रूप उर आवा परमानंद अमित सुख पावा
Verse 9
मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह
Verse 10
रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह
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