Book 1 • Chapter 130
Section 130
10 verses
Verse 1
बसहिं नगर सुंदर नर नारी जनु बहु मनसिज रति तनुधारी
Verse 2
तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा अगनित हय गय सेन समाजा
Verse 3
सत सुरेस सम बिभव बिलासा रूप तेज बल नीति निवासा
Verse 4
बिस्वमोहनी तासु कुमारी श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी
Verse 5
सोइ हरिमाया सब गुन खानी सोभा तासु कि जाइ बखानी
Verse 6
करइ स्वयंबर सो नृपबाला आए तहँ अगनित महिपाला
Verse 7
मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ
Verse 8
सुनि सब चरित भूपगृहँ आए करि पूजा नृप मुनि बैठाए
Verse 9
आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि
Verse 10
कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि
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