Book 1 • Chapter 165
Section 165
10 verses
Verse 1
कह तापस नृप ऐसेइ होऊ कारन एक कठिन सुनु सोऊ
Verse 2
कालउ तुअ पद नाइहि सीसा एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा
Verse 3
तपबल बिप्र सदा बरिआरा तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा
Verse 4
जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा
Verse 5
चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई
Verse 6
बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला तोर नास नहि कवनेहुँ काला
Verse 7
हरषेउ राउ बचन सुनि तासू नाथ न होइ मोर अब नासू
Verse 8
तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना मो कहुँ सर्ब काल कल्याना
Verse 9
एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि
Verse 10
मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि
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