Book 1 • Chapter 166
Section 166
10 verses
Verse 1
तातें मै तोहि बरजउँ राजा कहें कथा तव परम अकाजा
Verse 2
छठें श्रवन यह परत कहानी नास तुम्हार सत्य मम बानी
Verse 3
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा नास तोर सुनु भानुप्रतापा
Verse 4
आन उपायँ निधन तव नाहीं जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं
Verse 5
सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा द्विज गुर कोप कहहु को राखा
Verse 6
राखइ गुर जौं कोप बिधाता गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता
Verse 7
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें होउ नास नहिं सोच हमारें
Verse 8
एकहिं डर डरपत मन मोरा प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा
Verse 9
होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ
Verse 10
तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ
0:000:00
Speed: