Book 1 • Chapter 196
Section 196
10 verses
Verse 1
यह रहस्य काहू नहिं जाना दिन मनि चले करत गुनगाना
Verse 2
देखि महोत्सव सुर मुनि नागा चले भवन बरनत निज भागा
Verse 3
औरउ एक कहउँ निज चोरी सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी
Verse 4
काक भुसुंडि संग हम दोऊ मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ
Verse 5
परमानंद प्रेमसुख फूले बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले
Verse 6
यह सुभ चरित जान पै सोई कृपा राम कै जापर होई
Verse 7
तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा
Verse 8
गज रथ तुरग हेम गो हीरा दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा
Verse 9
मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहि असीस
Verse 10
सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसिदास के ईस
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