Book 1 • Chapter 199
Section 199
14 verses
Verse 1
काम कोटि छबि स्याम सरीरा नील कंज बारिद गंभीरा
Verse 2
अरुन चरन पकंज नख जोती कमल दलन्हि बैठे जनु मोती
Verse 3
रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे
Verse 4
कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा नाभि गभीर जान जेहि देखा
Verse 5
भुज बिसाल भूषन जुत भूरी हियँ हरि नख अति सोभा रूरी
Verse 6
उर मनिहार पदिक की सोभा बिप्र चरन देखत मन लोभा
Verse 7
कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई आनन अमित मदन छबि छाई
Verse 8
दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे नासा तिलक को बरनै पारे
Verse 9
सुंदर श्रवन सुचारु कपोला अति प्रिय मधुर तोतरे बोला
Verse 10
चिक्कन कच कुंचित गभुआरे बहु प्रकार रचि मातु सँवारे
Verse 11
पीत झगुलिआ तनु पहिराई जानु पानि बिचरनि मोहि भाई
Verse 12
रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा
Verse 13
सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत
Verse 14
दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत
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