Book 1 • Chapter 201
Section 201
10 verses
Verse 1
एक बार जननीं अन्हवाए करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए
Verse 2
निज कुल इष्टदेव भगवाना पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना
Verse 3
करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा आपु गई जहँ पाक बनावा
Verse 4
बहुरि मातु तहवाँ चलि आई भोजन करत देख सुत जाई
Verse 5
गै जननी सिसु पहिं भयभीता देखा बाल तहाँ पुनि सूता
Verse 6
बहुरि आइ देखा सुत सोई हृदयँ कंप मन धीर न होई
Verse 7
इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा
Verse 8
देखि राम जननी अकुलानी प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी
Verse 9
देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड
Verse 10
रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड
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