Book 1 • Chapter 21
Section 21
10 verses
Verse 1
समुझत सरिस नाम अरु नामी प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी
Verse 2
नाम रूप दुइ ईस उपाधी अकथ अनादि सुसामुझि साधी
Verse 3
को बड़ छोट कहत अपराधू सुनि गुन भेद समुझिहहिं साधू
Verse 4
देखिअहिं रूप नाम आधीना रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना
Verse 5
रूप बिसेष नाम बिनु जानें करतल गत न परहिं पहिचानें
Verse 6
सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें आवत हृदयँ सनेह बिसेषें
Verse 7
नाम रूप गति अकथ कहानी समुझत सुखद न परति बखानी
Verse 8
अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी
Verse 9
राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार
Verse 10
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर
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