Book 1 • Chapter 214
Section 214
10 verses
Verse 1
सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा भूप भीर नट मागध भाटा
Verse 2
बनी बिसाल बाजि गज साला हय गय रथ संकुल सब काला
Verse 3
सूर सचिव सेनप बहुतेरे नृपगृह सरिस सदन सब केरे
Verse 4
पुर बाहेर सर सारित समीपा उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा
Verse 5
देखि अनूप एक अँवराई सब सुपास सब भाँति सुहाई
Verse 6
कौसिक कहेउ मोर मनु माना इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना
Verse 7
भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता उतरे तहँ मुनिबृंद समेता
Verse 8
बिस्वामित्र महामुनि आए समाचार मिथिलापति पाए
Verse 9
संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति
Verse 10
चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति
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