Book 1 • Chapter 213
Section 213
10 verses
Verse 1
बनइ न बरनत नगर निकाई जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई
Verse 2
चारु बजारु बिचित्र अँबारी मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी
Verse 3
धनिक बनिक बर धनद समाना बैठ सकल बस्तु लै नाना
Verse 4
चौहट सुंदर गलीं सुहाई संतत रहहिं सुगंध सिंचाई
Verse 5
मंगलमय मंदिर सब केरें चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें
Verse 6
पुर नर नारि सुभग सुचि संता धरमसील ग्यानी गुनवंता
Verse 7
अति अनूप जहँ जनक निवासू बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू
Verse 8
होत चकित चित कोट बिलोकी सकल भुवन सोभा जनु रोकी
Verse 9
धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति
Verse 10
सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति
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