Book 1 • Chapter 219
Section 219
10 verses
Verse 1
मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता चले लोक लोचन सुख दाता
Verse 2
बालक बृंदि देखि अति सोभा लगे संग लोचन मनु लोभा
Verse 3
पीत बसन परिकर कटि भाथा चारु चाप सर सोहत हाथा
Verse 4
तन अनुहरत सुचंदन खोरी स्यामल गौर मनोहर जोरी
Verse 5
केहरि कंधर बाहु बिसाला उर अति रुचिर नागमनि माला
Verse 6
सुभग सोन सरसीरुह लोचन बदन मयंक तापत्रय मोचन
Verse 7
कानन्हि कनक फूल छबि देहीं चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं
Verse 8
चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी
Verse 9
रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस
Verse 10
नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस
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