Book 1 • Chapter 225
Section 225
10 verses
Verse 1
सिसु सब राम प्रेमबस जाने प्रीति समेत निकेत बखाने
Verse 2
निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई सहित सनेह जाहिं दोउ भाई
Verse 3
राम देखावहिं अनुजहि रचना कहि मृदु मधुर मनोहर बचना
Verse 4
लव निमेष महँ भुवन निकाया रचइ जासु अनुसासन माया
Verse 5
भगति हेतु सोइ दीनदयाला चितवत चकित धनुष मखसाला
Verse 6
कौतुक देखि चले गुरु पाहीं जानि बिलंबु त्रास मन माहीं
Verse 7
जासु त्रास डर कहुँ डर होई भजन प्रभाउ देखावत सोई
Verse 8
कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं किए बिदा बालक बरिआई
Verse 9
सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ
Verse 10
गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ
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