Book 1 • Chapter 239
Section 239
12 verses
Verse 1
नृप सब नखत करहिं उजिआरी टारि न सकहिं चाप तम भारी
Verse 2
कमल कोक मधुकर खग नाना हरषे सकल निसा अवसाना
Verse 3
ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे होइहहिं टूटें धनुष सुखारे
Verse 4
उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा दुरे नखत जग तेजु प्रकासा
Verse 5
रबि निज उदय ब्याज रघुराया प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया
Verse 6
तव भुज बल महिमा उदघाटी प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी
Verse 7
बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने होइ सुचि सहज पुनीत नहाने
Verse 8
नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए चरन सरोज सुभग सिर नाए
Verse 9
सतानंदु तब जनक बोलाए कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए
Verse 10
जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई हरषे बोलि लिए दोउ भाई
Verse 11
सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ
Verse 12
चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ
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