Book 1 • Chapter 26
Section 26
10 verses
Verse 1
नाम प्रसाद संभु अबिनासी साजु अमंगल मंगल रासी
Verse 2
सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी
Verse 3
नारद जानेउ नाम प्रतापू जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू
Verse 4
नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू भगत सिरोमनि भे प्रहलादू
Verse 5
ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ पायउ अचल अनूपम ठाऊँ
Verse 6
सुमिरि पवनसुत पावन नामू अपने बस करि राखे रामू
Verse 7
अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ
Verse 8
कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई रामु न सकहिं नाम गुन गाई
Verse 9
नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु
Verse 10
जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु
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