Book 1 • Chapter 267
Section 267
10 verses
Verse 1
बैनतेय बलि जिमि चह कागू जिमि ससु चहै नाग अरि भागू
Verse 2
जिमि चह कुसल अकारन कोही सब संपदा चहै सिवद्रोही
Verse 3
लोभी लोलुप कल कीरति चहई अकलंकता कि कामी लहई
Verse 4
हरि पद बिमुख परम गति चाहा तस तुम्हार लालचु नरनाहा
Verse 5
कोलाहलु सुनि सीय सकानी सखीं लवाइ गईं जहँ रानी
Verse 6
रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं सिय सनेहु बरनत मन माहीं
Verse 7
रानिन्ह सहित सोचबस सीया अब धौं बिधिहि काह करनीया
Verse 8
भूप बचन सुनि इत उत तकहीं लखनु राम डर बोलि न सकहीं
Verse 9
अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप
Verse 10
मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप
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