Book 1 • Chapter 274
Section 274
10 verses
Verse 1
कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु कुटिल कालबस निज कुल घालकु
Verse 2
भानु बंस राकेस कलंकू निपट निरंकुस अबुध असंकू
Verse 3
काल कवलु होइहि छन माहीं कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं
Verse 4
तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा
Verse 5
लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा तुम्हहि अछत को बरनै पारा
Verse 6
अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी बार अनेक भाँति बहु बरनी
Verse 7
नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू
Verse 8
बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा गारी देत न पावहु सोभा
Verse 9
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु
Verse 10
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु
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