Book 1 • Chapter 275
Section 275
10 verses
Verse 1
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा बार बार मोहि लागि बोलावा
Verse 2
सुनत लखन के बचन कठोरा परसु सुधारि धरेउ कर घोरा
Verse 3
अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू कटुबादी बालकु बधजोगू
Verse 4
बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा अब यहु मरनिहार भा साँचा
Verse 5
कौसिक कहा छमिअ अपराधू बाल दोष गुन गनहिं न साधू
Verse 6
खर कुठार मैं अकरुन कोही आगें अपराधी गुरुद्रोही
Verse 7
उतर देत छोड़उँ बिनु मारें केवल कौसिक सील तुम्हारें
Verse 8
न त एहि काटि कुठार कठोरें गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें
Verse 9
गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ
Verse 10
अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ
0:000:00
Speed: