Book 1 • Chapter 276
Section 276
10 verses
Verse 1
कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा को नहि जान बिदित संसारा
Verse 2
माता पितहि उरिन भए नीकें गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें
Verse 3
सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा
Verse 4
अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली तुरत देउँ मैं थैली खोली
Verse 5
सुनि कटु बचन कुठार सुधारा हाय हाय सब सभा पुकारा
Verse 6
भृगुबर परसु देखावहु मोही बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही
Verse 7
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े द्विज देवता घरहि के बाढ़े
Verse 8
अनुचित कहि सब लोग पुकारे रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे
Verse 9
लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु
Verse 10
बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु
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