Book 1 • Chapter 277
Section 277
10 verses
Verse 1
नाथ करहु बालक पर छोहू सूध दूधमुख करिअ न कोहू
Verse 2
जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना तौ कि बराबरि करत अयाना
Verse 3
जौं लरिका कछु अचगरि करहीं गुर पितु मातु मोद मन भरहीं
Verse 4
करिअ कृपा सिसु सेवक जानी तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी
Verse 5
राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने कहि कछु लखनु बहुरि मुसकाने
Verse 6
हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी राम तोर भ्राता बड़ पापी
Verse 7
गौर सरीर स्याम मन माहीं कालकूटमुख पयमुख नाहीं
Verse 8
सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही नीचु मीचु सम देख न मौहीं
Verse 9
लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल
Verse 10
जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल
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