Book 1 • Chapter 278
Section 278
10 verses
Verse 1
मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया परिहरि कोपु करिअ अब दाया
Verse 2
टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने बैठिअ होइहिं पाय पिराने
Verse 3
जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई
Verse 4
बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं
Verse 5
थर थर कापहिं पुर नर नारी छोट कुमार खोट बड़ भारी
Verse 6
भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी रिस तन जरइ होइ बल हानी
Verse 7
बोले रामहि देइ निहोरा बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा
Verse 8
मनु मलीन तनु सुंदर कैसें बिष रस भरा कनक घटु जैसैं
Verse 9
सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम
Verse 10
गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम
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