Book 1 • Chapter 280
Section 280
10 verses
Verse 1
बहइ न हाथु दहइ रिस छाती भा कुठारु कुंठित नृपघाती
Verse 2
भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ
Verse 3
आजु दया दुखु दुसह सहावा सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा
Verse 4
बाउ कृपा मूरति अनुकूला बोलत बचन झरत जनु फूला
Verse 5
जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता क्रोध भएँ तनु राख बिधाता
Verse 6
देखु जनक हठि बालक एहू कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू
Verse 7
बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा देखत छोट खोट नृप ढोटा
Verse 8
बिहसे लखनु कहा मन माहीं मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं
Verse 9
परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु
Verse 10
संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु
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