Book 1 • Chapter 286
Section 286
10 verses
Verse 1
अति गहगहे बाजने बाजे सबहिं मनोहर मंगल साजे
Verse 2
जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं करहिं गान कल कोकिलबयनी
Verse 3
सुखु बिदेह कर बरनि न जाई जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई
Verse 4
गत त्रास भइ सीय सुखारी जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी
Verse 5
जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा
Verse 6
मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं अब जो उचित सो कहिअ गोसाई
Verse 7
कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना रहा बिबाहु चाप आधीना
Verse 8
टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू सुर नर नाग बिदित सब काहु
Verse 9
तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु
Verse 10
बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु
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