Book 1 • Chapter 292
Section 292
10 verses
Verse 1
पूछन जोगु न तनय तुम्हारे पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे
Verse 2
जिन्ह के जस प्रताप कें आगे ससि मलीन रबि सीतल लागे
Verse 3
तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे
Verse 4
सीय स्वयंबर भूप अनेका समिटे सुभट एक तें एका
Verse 5
संभु सरासनु काहुँ न टारा हारे सकल बीर बरिआरा
Verse 6
तीनि लोक महँ जे भटमानी सभ कै सकति संभु धनु भानी
Verse 7
सकइ उठाइ सरासुर मेरू सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू
Verse 8
जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा
Verse 9
तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल
Verse 10
भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल
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