Book 1 • Chapter 327
Section 327
10 verses
Verse 1
स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन सोभा कोटि मनोज लजावन
Verse 2
जावक जुत पद कमल सुहाए मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए
Verse 3
पीत पुनीत मनोहर धोती हरति बाल रबि दामिनि जोती
Verse 4
कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर
Verse 5
पीत जनेउ महाछबि देई कर मुद्रिका चोरि चितु लेई
Verse 6
सोहत ब्याह साज सब साजे उर आयत उरभूषन राजे
Verse 7
पिअर उपरना काखासोती दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती
Verse 8
नयन कमल कल कुंडल काना बदनु सकल सौंदर्ज निधाना
Verse 9
सुंदर भृकुटि मनोहर नासा भाल तिलकु रुचिरता निवासा
Verse 10
सोहत मौरु मनोहर माथे मंगलमय मुकुता मनि गाथे
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