Book 1 • Chapter 326
Section 326
8 verses
Verse 1
जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी
Verse 2
कहि न जाइ कछु दाइज भूरी रहा कनक मनि मंडपु पूरी
Verse 3
कंबल बसन बिचित्र पटोरे भाँति भाँति बहु मोल न थोरे
Verse 4
गज रथ तुरग दास अरु दासी धेनु अलंकृत कामदुहा सी
Verse 5
बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा
Verse 6
लोकपाल अवलोकि सिहाने लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने
Verse 7
दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा उबरा सो जनवासेहिं आवा
Verse 8
तब कर जोरि जनकु मृदु बानी बोले सब बरात सनमानी
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