Book 1 • Chapter 329
Section 329
10 verses
Verse 1
पंच कवल करि जेवन लअगे गारि गान सुनि अति अनुरागे
Verse 2
भाँति अनेक परे पकवाने सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने
Verse 3
परुसन लगे सुआर सुजाना बिंजन बिबिध नाम को जाना
Verse 4
चारि भाँति भोजन बिधि गाई एक एक बिधि बरनि न जाई
Verse 5
छरस रुचिर बिंजन बहु जाती एक एक रस अगनित भाँती
Verse 6
जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी लै लै नाम पुरुष अरु नारी
Verse 7
समय सुहावनि गारि बिराजा हँसत राउ सुनि सहित समाजा
Verse 8
एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा आदर सहित आचमनु दीन्हा
Verse 9
देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज
Verse 10
जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज
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