Book 1 • Chapter 356
Section 356
10 verses
Verse 1
भूप बचन सुनि सहज सुहाए जरित कनक मनि पलँग डसाए
Verse 2
सुभग सुरभि पय फेन समाना कोमल कलित सुपेतीं नाना
Verse 3
उपबरहन बर बरनि न जाहीं स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं
Verse 4
रतनदीप सुठि चारु चँदोवा कहत न बनइ जान जेहिं जोवा
Verse 5
सेज रुचिर रचि रामु उठाए प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए
Verse 6
अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही
Verse 7
देखि स्याम मृदु मंजुल गाता कहहिं सप्रेम बचन सब माता
Verse 8
मारग जात भयावनि भारी केहि बिधि तात ताड़का मारी
Verse 9
घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु
Verse 10
मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु
0:000:00
Speed: