Book 1 • Chapter 44
Section 44
10 verses
Verse 1
भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा तिन्हहि राम पद अति अनुरागा
Verse 2
तापस सम दम दया निधाना परमारथ पथ परम सुजाना
Verse 3
माघ मकरगत रबि जब होई तीरथपतिहिं आव सब कोई
Verse 4
देव दनुज किंनर नर श्रेनी सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं
Verse 5
पूजहि माधव पद जलजाता परसि अखय बटु हरषहिं गाता
Verse 6
भरद्वाज आश्रम अति पावन परम रम्य मुनिबर मन भावन
Verse 7
तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा जाहिं जे मज्जन तीरथराजा
Verse 8
मज्जहिं प्रात समेत उछाहा कहहिं परसपर हरि गुन गाहा
Verse 9
ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग
Verse 10
कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग
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