Book 1 • Chapter 49
Section 49
10 verses
Verse 1
रावन मरन मनुज कर जाचा प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा
Verse 2
जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा करत बिचारु न बनत बनावा
Verse 3
एहि बिधि भए सोचबस ईसा तेहि समय जाइ दससीसा
Verse 4
लीन्ह नीच मारीचहि संगा भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा
Verse 5
करि छलु मूढ़ हरी बैदेही प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही
Verse 6
मृग बधि बन्धु सहित हरि आए आश्रमु देखि नयन जल छाए
Verse 7
बिरह बिकल नर इव रघुराई खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई
Verse 8
कबहूँ जोग बियोग न जाकें देखा प्रगट बिरह दुख ताकें
Verse 9
अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान
Verse 10
जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन
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