Book 1 • Chapter 48
Section 48
12 verses
Verse 1
एक बार त्रेता जुग माहीं संभु गए कुंभज रिषि पाहीं
Verse 2
संग सती जगजननि भवानी पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी
Verse 3
रामकथा मुनीबर्ज बखानी सुनी महेस परम सुखु मानी
Verse 4
रिषि पूछी हरिभगति सुहाई कही संभु अधिकारी पाई
Verse 5
कहत सुनत रघुपति गुन गाथा कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा
Verse 6
मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी चले भवन सँग दच्छकुमारी
Verse 7
तेहि अवसर भंजन महिभारा हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा
Verse 8
पिता बचन तजि राजु उदासी दंडक बन बिचरत अबिनासी
Verse 9
ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ
Verse 10
गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ 48(क)
Verse 11
संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ
Verse 12
तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची 48(ख)
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