Book 1 • Chapter 47
Section 47
10 verses
Verse 1
जैसे मिटै मोर भ्रम भारी कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी
Verse 2
जागबलिक बोले मुसुकाई तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई
Verse 3
राममगत तुम्ह मन क्रम बानी चतुराई तुम्हारी मैं जानी
Verse 4
चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा
Verse 5
तात सुनहु सादर मनु लाई कहउँ राम कै कथा सुहाई
Verse 6
महामोहु महिषेसु बिसाला रामकथा कालिका कराला
Verse 7
रामकथा ससि किरन समाना संत चकोर करहिं जेहि पाना
Verse 8
ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी महादेव तब कहा बखानी
Verse 9
कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद
Verse 10
भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद
0:000:00
Speed: