Book 1 • Chapter 54
Section 54
10 verses
Verse 1
मैं संकर कर कहा न माना निज अग्यानु राम पर आना
Verse 2
जाइ उतरु अब देहउँ काहा उर उपजा अति दारुन दाहा
Verse 3
जाना राम सतीं दुखु पावा निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा
Verse 4
सतीं दीख कौतुकु मग जाता आगें रामु सहित श्री भ्राता
Verse 5
फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा सहित बंधु सिय सुंदर वेषा
Verse 6
जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना
Verse 7
देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका अमित प्रभाउ एक तें एका
Verse 8
बंदत चरन करत प्रभु सेवा बिबिध बेष देखे सब देवा
Verse 9
सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप
Verse 10
जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप
0:000:00
Speed: