Book 1 • Chapter 60
Section 60
10 verses
Verse 1
एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी अकथनीय दारुन दुखु भारी
Verse 2
बीतें संबत सहस सतासी तजी समाधि संभु अबिनासी
Verse 3
राम नाम सिव सुमिरन लागे जानेउ सतीं जगतपति जागे
Verse 4
जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही सनमुख संकर आसनु दीन्हा
Verse 5
लगे कहन हरिकथा रसाला दच्छ प्रजेस भए तेहि काला
Verse 6
देखा बिधि बिचारि सब लायक दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक
Verse 7
बड़ अधिकार दच्छ जब पावा अति अभिमानु हृदयँ तब आवा
Verse 8
नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं
Verse 9
दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग
Verse 10
नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग
0:000:00
Speed: