Book 1 • Chapter 86
Section 86
8 verses
Verse 1
उभय घरी अस कौतुक भयऊ जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ
Verse 2
सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू भयउ जथाथिति सबु संसारू
Verse 3
भए तुरत सब जीव सुखारे जिमि मद उतरि गएँ मतवारे
Verse 4
रुद्रहि देखि मदन भय माना दुराधरष दुर्गम भगवाना
Verse 5
फिरत लाज कछु करि नहिं जाई मरनु ठानि मन रचेसि उपाई
Verse 6
प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा कुसुमित नव तरु राजि बिराजा
Verse 7
बन उपबन बापिका तड़ागा परम सुभग सब दिसा बिभागा
Verse 8
जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा
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