Book 1 • Chapter 89
Section 89
10 verses
Verse 1
यह उत्सव देखिअ भरि लोचन सोइ कछु करहु मदन मद मोचन
Verse 2
कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा
Verse 3
सासति करि पुनि करहिं पसाऊ नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ
Verse 4
पारबतीं तपु कीन्ह अपारा करहु तासु अब अंगीकारा
Verse 5
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी
Verse 6
तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं बरषि सुमन जय जय सुर साई
Verse 7
अवसरु जानि सप्तरिषि आए तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए
Verse 8
प्रथम गए जहँ रही भवानी बोले मधुर बचन छल सानी
Verse 9
कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस
Verse 10
अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस
0:000:00
Speed: