Book 1 • Chapter 90
Section 90
10 verses
Verse 1
सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी
Verse 2
तुम्हरें जान कामु अब जारा अब लगि संभु रहे सबिकारा
Verse 3
हमरें जान सदा सिव जोगी अज अनवद्य अकाम अभोगी
Verse 4
जौं मैं सिव सेये अस जानी प्रीति समेत कर्म मन बानी
Verse 5
तौ हमार पन सुनहु मुनीसा करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा
Verse 6
तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा
Verse 7
तात अनल कर सहज सुभाऊ हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ
Verse 8
गएँ समीप सो अवसि नसाई असि मन्मथ महेस की नाई
Verse 9
हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास
Verse 10
चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास
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