Book 1 • Chapter 98
Section 98
8 verses
Verse 1
तब नारद सबहि समुझावा पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा
Verse 2
मयना सत्य सुनहु मम बानी जगदंबा तव सुता भवानी
Verse 3
अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि सदा संभु अरधंग निवासिनि
Verse 4
जग संभव पालन लय कारिनि निज इच्छा लीला बपु धारिनि
Verse 5
जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई नामु सती सुंदर तनु पाई
Verse 6
तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं
Verse 7
एक बार आवत सिव संगा देखेउ रघुकुल कमल पतंगा
Verse 8
भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा
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